250+ Best Bhagavad Gita Quotes In Hindi | भगवद गीता के उद्धरण

250+ Best Bhagavad Gita Quotes In Hindi | भगवद गीता के उद्धरण

Bhagavad Gita Quotes In Hindi: जीवन के गहरे रहस्यों को समझने के लिए Bhagavad Gita Quotes In Hindi का संग्रह अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह आपको कर्म, धर्म और ज्ञान के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करेगा।

ये अनमोल वचन जीवन की हर चुनौती का सामना करने की शक्ति देते हैं। Bhagavad Gita Quotes In Hindi से प्राप्त ज्ञान, आपके भीतर शांति और सकारात्मकता का संचार करता है।

आप इन विचारों को अपने प्रियजनों के साथ साझा कर सकते हैं। Bhagavad Gita Quotes In Hindi को स्टेटस या संदेश के रूप में प्रयोग करें। यह प्रेरणा का उत्तम स्रोत है।

Bhagavad Gita Quotes In Hindi

Bhagavad Gita Quotes In Hindi

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥
अपने कर्म पर तुम्हारा अधिकार है, उसके फलों पर कभी नहीं।
कर्म का फल ही तुम्हारा हेतु न बने, और अकर्म में भी तुम्हारी आसक्ति न हो।

अध्याय दो, श्लोक 47
जो कार्य करो, उसमें ही तुम्हारा अधिकार है,
फल की चिंता कभी न करना, यही है कर्म का सार।
फल की इच्छा से दूर रहना, और आलस्य में न फँसना,
यही है भगवद् गीता का सच्चा उपदेश, जीवन का आधार।

मन की शांति तब मिलती है,
जब हम ईश्वर की इच्छा पर भरोसा करते हैं।
कर्म करते रहो, फल की चिंता छोड़ दो,
जीवन का सच्चा सुख तभी प्राप्त होता है।

जो व्यक्ति न किसी से द्वेष करता है, न किसी से ईर्ष्या,
न क्रोधित होता है, न भयभीत, वही ज्ञानी है,
जो निर्भय, शांत और सदा प्रसन्न रहता है,
वह मुझको अत्यंत प्रिय है, इसमें कोई शंका नहीं।

जिसका मन वश में नहीं है,
उसके लिए वह शत्रु के समान है।
किन्तु जिसका मन वश में है,
उसके लिए वह मित्र के समान है।

आत्मा अमर है, इसे न कोई जला सकता है,
न कोई बुझा सकता है, न कोई गीला कर सकता है,
न कोई सुखा सकता है, यह सनातन है,
तो फिर मृत्यु से क्यों डरना?

समानता ही ज्ञान है, और ज्ञान ही मुक्ति।
सभी प्राणियों में एक ही ईश्वर को देखो,
यही भगवद् गीता का संदेश है,
इससे ही सच्चा सुख पाओ।

जो व्यक्ति अपनी इंद्रियों को वश में रखता है,
और मन को एकाग्र करता है, वह स्थिर बुद्धि वाला,
और शांत चित्त वाला कहलाता है।
ऐसे व्यक्ति को योग की उच्चतम अवस्था प्राप्त होती है।

निश्चितता से जन्म लेने वाले के लिए मृत्यु निश्चित है,
और मृत्यु से निश्चित रूप से जन्म होगा।
अतः जो अवश्यंभावी है, उसके लिए तुम्हें शोक नहीं करना चाहिए।
आत्मभाव से ही जीवन का सत्य मिलता है।

हे अर्जुन, तुम न तो किसी को मार सकते हो, न ही मर सकते हो।
आत्मा का जन्म या मृत्यु नहीं होती, यह केवल शरीर बदलती है।
तुम्हारा कार्य है कर्म करना, फल की चिंता छोड़ देना,
यही है जीवन का परम ज्ञान।

जो भी व्यक्ति किसी भी भाव से,
मेरा स्मरण करता है, मैं उसे प्राप्त होता हूँ।
सब मनुष्य मेरे मार्ग का अनुसरण करते हैं,
यह केवल उन्हीं के लिए है।

जब तुम आसक्ति रहित होकर कर्म करते हो,
तो तुम्हें कर्म बंधन में नहीं बांधता।
तब तुम स्वयं को परमात्मा के करीब पाते हो,
और मोक्ष का मार्ग पाते हो।

जो व्यक्ति सब प्रकार की इच्छाओं का त्याग कर देता है,
और ‘मैं’ तथा ‘मेरा’ की भावना से मुक्त हो जाता है,
वह शांति को प्राप्त होता है।
यह आत्मज्ञान का सबसे बड़ा फल है।

ज्ञान की अग्नि में सभी कर्म भस्म हो जाते हैं।
जो अपने आपको जान लेता है,
वह कर्मों के बंधन से मुक्त हो जाता है।
यही है भगवद् गीता का सार।

सांसारिक सुख क्षणभंगुर हैं,
परमात्मा का प्रेम शाश्वत है।
सच्चा सुख वही है,
जो आत्मा के अंदर मिलता है।

जो व्यक्ति अपनी इंद्रियों को वश में नहीं रखता,
और उनका दास बन जाता है,
वह अपना सर्वनाश कर बैठता है।
उसे न शांति मिलती है, न सिद्धि।

जो सत्य को जानता है, वह ज्ञानी है,
जो सत्य का पालन करता है, वह धर्मी है।
और जो सत्य को जीवन में उतारता है,
वही भगवद् गीता के मार्ग पर चलता है।

यह शरीर नश्वर है, आत्मा अनन्त है।
जब तुम यह जान जाओगे,
तो भय और चिंता तुमसे कोसों दूर चली जाएगी।
शांति तुम्हारे मन में वास करेगी।

हे पार्थ, जो मुझे देखता है,
और सब जगह मुझको ही देखता है,
और जो मुझे देखता है, उसे भी मैं देखता हूँ,
वह मुझसे कभी अलग नहीं होता।

जो व्यक्ति धैर्य के साथ,
अपने कर्तव्य का पालन करता है,
और फल की चिंता नहीं करता,
वह ईश्वर को अवश्य प्राप्त करता है।

Bhagavad Gita Quotes In Hindi On Life

Bhagavad Gita Quotes In Hindi On Life

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन,
कर्म करने में तेरा अधिकार है, फल की इच्छा कभी नहीं।
न त्वं शोचितुमर्हसि, क्योंकि तेरा जन्म ही निश्चित है,
और मृत्यु के उपरांत भी निश्चित है उसका जन्म।

सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज,
सभी धर्मों को त्यागकर मुझ एक की शरण में आओ।
अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः,
मैं तुझे सभी पापों से मुक्त कर दूंगा, शोक मत कर।

नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः,
न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः।
यह आत्मा न तो शस्त्रों से काटी जा सकती है, न आग से जलाई जा सकती है,
न पानी से इसे गलाया जा सकता है, न हवा से सुखाया जा सकता है।

अध्याय 2, श्लोक 47

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥

तू केवल कर्म करने का अधिकारी है, उसके फलों में कभी नहीं। इसलिए कर्मफल को अपना उद्देश्य मत बना और कर्म न करने में भी आसक्त मत हो।

अध्याय 18, श्लोक 61

ईश्वरः सर्वभूतानां हृद्देशेऽर्जुन तिष्ठति।
भ्रामयन् सर्वभूतानि यन्त्रारूढानि मायया॥

हे अर्जुन! ईश्वर सभी प्राणियों के हृदय में निवास करता है और अपनी माया से उन्हें ऐसे घुमाता रहता है, जैसे वे किसी यंत्र पर आरूढ़ हों।

अध्याय 15, श्लोक 7

ममैवांशो जीवलोके जीवभूतः सनातनः।
मनःषष्ठानीन्द्रियाणि प्रकृतिस्थानि कर्षति॥

इस संसार में जीव मेरा ही सनातन अंश है। वह प्रकृति में स्थित मन और पाँचों इन्द्रियों को अपनी ओर आकर्षित करता है।

अध्याय 6, श्लोक 10

योगी युञ्जीत सततमात्मानं रहसि स्थितः।
एकाकी यतचित्तात्मा निराशीरपरिग्रहः॥

योगी को एकांत स्थान में रहकर निरंतर अपने मन को परमात्मा में लगाना चाहिए। उसे अकेले रहकर मन और शरीर को नियंत्रित रखना चाहिए तथा किसी वस्तु की इच्छा और संग्रह से मुक्त रहना चाहिए।

अध्याय 2, श्लोक 22

वासांसि जीर्णानि यथा विहाय
नवानि गृह्णाति नरोऽपराणि।
तथा शरीराणि विहाय जीर्णान्यन्यानि संयाति नवानि देही॥

जिस प्रकार मनुष्य पुराने वस्त्रों को त्यागकर नए वस्त्र धारण करता है, उसी प्रकार देहधारी आत्मा पुराने शरीर को त्यागकर नया शरीर धारण करती है।

अध्याय 2, श्लोक 62

ध्यायतो विषयान्पुंसः सङ्गस्तेषूपजायते।
सङ्गात्सञ्जायते कामः कामात्क्रोधोऽभिजायते॥

विषयों का चिंतन करते रहने से मनुष्य को उनमें आसक्ति हो जाती है। आसक्ति से कामना उत्पन्न होती है और कामना से क्रोध उत्पन्न होता है।

अध्याय 13, श्लोक 34

यथा प्रकाशयत्येकः कृत्स्नं लोकमिमं रविः।
क्षेत्रं क्षेत्री तथा कृत्स्नं प्रकाशयति भारत॥

हे भारत! जिस प्रकार एक ही सूर्य संपूर्ण संसार को प्रकाशित करता है, उसी प्रकार क्षेत्रज्ञ पूरे क्षेत्र अर्थात शरीर को प्रकाशित करता है।

अध्याय 4, श्लोक 18

कर्मण्यकर्म यः पश्येदकर्मणि च कर्म यः।
स बुद्धिमान्मनुष्येषु स युक्तः कृत्स्नकर्मकृत्॥

जो मनुष्य कर्म में अकर्म और अकर्म में कर्म देखता है, वही मनुष्यों में बुद्धिमान है। वह योगी है और उसने सभी कर्मों को सही रूप से किया है।

अध्याय 14, श्लोक 18

ऊर्ध्वं गच्छन्ति सत्त्वस्था मध्ये तिष्ठन्ति राजसाः।
जघन्यगुणवृत्तिस्था अधो गच्छन्ति तामसाः॥

सत्त्वगुण में स्थित व्यक्ति उच्च लोकों की ओर जाते हैं, रजोगुण में स्थित लोग मध्य में रहते हैं और तमोगुण की वृत्ति में स्थित लोग नीचे जाते हैं।

अध्याय 9, श्लोक 29

समोऽहं सर्वभूतेषु न मे द्वेष्योऽस्ति न प्रियः।
ये भजन्ति तु मां भक्त्या मयि ते तेषु चाप्यहम्॥

मैं सभी प्राणियों में समान रूप से स्थित हूँ। न कोई मेरा द्वेषी है और न कोई मेरा प्रिय। लेकिन जो भक्तिपूर्वक मेरा भजन करते हैं, वे मुझमें स्थित हैं और मैं भी उनमें स्थित हूँ।

अध्याय 12, श्लोक 20

ये तु धर्म्यामृतमिदं यथोक्तं पर्युपासते।
श्रद्दधाना मत्परमा भक्तास्तेऽतीव मे प्रियाः॥

जो श्रद्धापूर्वक इस अमृतस्वरूप धर्म का पालन करते हैं और मुझे ही अपना परम लक्ष्य मानकर मेरी भक्ति करते हैं, वे मुझे अत्यंत प्रिय हैं।

अध्याय 10, श्लोक 4-5

बुद्धिर्ज्ञानमसम्मोहः क्षमा सत्यं दमः शमः।
सुखं दुःखं भवोऽभावो भयं चाभयमेव च॥
अहिंसा समता तुष्टिस्तपो दानं यशोऽयशः।
भवन्ति भावा भूतानां मत्त एव पृथग्विधाः॥

बुद्धि, ज्ञान, मोह से मुक्ति, क्षमा, सत्य, इन्द्रिय-निग्रह, मन का संयम, सुख, दुःख, उत्पत्ति, विनाश, भय और अभय तथा अहिंसा, समता, संतोष, तप, दान, यश और अपयश—ये सभी प्राणियों के विभिन्न भाव मुझसे ही उत्पन्न होते हैं।

अध्याय 5, श्लोक 12

युक्तः कर्मफलं त्यक्त्वा शान्तिमाप्नोति नैष्ठिकीम्।
अयुक्तः कामकारेण फले सक्तो निबध्यते॥

कर्मफल का त्याग करने वाला कर्मयोगी स्थायी शांति को प्राप्त करता है। लेकिन जो व्यक्ति फल की इच्छा से कर्म करता है, वह कर्मफल में आसक्त होकर बंधन में पड़ जाता है।

अध्याय 13, श्लोक 20

प्रकृतिं पुरुषं चैव विद्ध्यनादी उभावपि।
विकारांश्च गुणांश्चैव विद्धि प्रकृतिसंभवान्॥

प्रकृति और पुरुष दोनों को अनादि जानो। शरीर में होने वाले सभी विकार और तीनों गुण प्रकृति से ही उत्पन्न होते हैं।

अध्याय 3, श्लोक 35

श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात्।
स्वधर्मे निधनं श्रेयः परधर्मो भयावहः॥

दूसरे के धर्म को अच्छी तरह निभाने की अपेक्षा अपना धर्म, भले ही उसमें कुछ कमी हो, अधिक श्रेष्ठ है। अपने धर्म का पालन करते हुए मृत्यु को प्राप्त होना भी कल्याणकारी है; दूसरे के धर्म का पालन करना भयावह है।

अध्याय 7, श्लोक 14

दैवी ह्येषा गुणमयी मम माया दुरत्यया।
मामेव ये प्रपद्यन्ते मायामेतां तरन्ति ते॥

मेरी यह त्रिगुणमयी दैवी माया अत्यंत कठिन है। लेकिन जो मेरी शरण में आते हैं, वे इस माया को पार कर जाते हैं।

अध्याय 18, श्लोक 63

इति ते ज्ञानमाख्यातं गुह्याद्गुह्यतरं मया।
विमृश्यैतदशेषेण यथेच्छसि तथा कुरु॥

इस प्रकार मैंने तुम्हें यह अत्यंत गोपनीय ज्ञान बताया है। अब तुम इस पर पूरी तरह विचार करके जैसा उचित समझो, वैसा करो।

Bhagavad Gita Quotes In Hindi For Students

Bhagavad Gita Quotes In Hindi For Students

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥
अपने कर्म पर ध्यान दो, फल की चिंता कभी न करो,
कर्महीन मत बनो, कर्म में ही आसक्ति रखो।

ज्ञान ही परम सत्य है, अज्ञान है अंधकार,
ज्ञान का प्रकाश फैलाओ, मिटाओ मन का भार॥
ज्ञानवान व्यक्ति ही मुक्ति पाता है,
अज्ञान से सदा दूर रहता है।

मन को शांत रखना ही सबसे बड़ा तप है,
अशांत मन ही दुख का कारण है॥
प्रयास करो इसे वश में करने का,
सुख-शांति का यही सच्चा अर्पण है।

जो बीत गया, उसे भूल जाओ,
जो आने वाला है, उसे संवारो॥
वर्तमान में जियो, यही सत्य है,
हर पल को अपना बनाओ।

धर्म का मार्ग कठिन है, पर वही है सच्चा,
अधर्म से दूर रहो, जीवन होगा अच्छा॥
सत्य की राह पर चलना, है वीर जवानों का काम,
यही है गीता का संदेश, यही है गीता का नाम।

सबके प्रति समान भाव रखो,
द्वेष और ईर्ष्या को दूर करो॥
प्रेम से सबको अपना बनाओ,
यही है ईश्वर की सच्ची सेवा।

आशा और निराशा से परे,
सब भावों को समान देखो॥
स्थिर बुद्धि वाला ही,
अमृतत्व को प्राप्त करता है।

अपने मन को कभी भटकने न देना,
सही मार्ग पर हमेशा चलते रहना॥
साधना और समर्पण से,
लक्ष्य को प्राप्त कर लेना।

ज्ञान अग्नि से सब कर्मों को,
भस्म कर दो तुम,
सांसारिक मोह-माया से,
मुक्त हो जाओ तुम।

जो इंद्रियों को वश में करता है,
परंतु मन से विषयों का चिंतन करता है,
वह भ्रमित है,
और उसे आत्म-ज्ञान नहीं होता।

क्रोध से भ्रम पैदा होता है,
भ्रम से स्मृति नष्ट हो जाती है,
स्मृति नष्ट होने से,
बुद्धि का पतन हो जाता है।

जो व्यक्ति सभी इच्छाओं को त्याग देता है,
और “मैं” और “मेरा” की भावना से मुक्त हो जाता है,
वह शांति प्राप्त करता है,
भले ही वह सभी प्राणियों के बीच रहता हो।

आत्म-ज्ञान ही सबसे बड़ा धन है,
इसे प्राप्त करने का प्रयास करो,
यह तुम्हें,
सभी दुखों से मुक्त करेगा।

समय अनमोल है, इसे व्यर्थ न गंवाओ,
हर पल का सदुपयोग कर,
अपने जीवन को,
सफल बनाओ।

सत्य का मार्ग कठिन हो सकता है,
पर अंत में यही विजय दिलाता है,
ईमानदारी से अपना,
कर्तव्य निभाओ।

अपने कर्म पर विश्वास रखो,
और निरंतर आगे बढ़ते रहो,
सफलता अवश्य,
तुम्हारे कदम चूमेगी।

शरीर नश्वर है, आत्मा अमर है,
इस सत्य को पहचान,
भय और चिंता,
को दूर भगाओ।

ईश्वर सब में विद्यमान है,
सबके प्रति प्रेम,
और करुणा रखो,
यही सच्ची भक्ति है।

जो स्वयं को जानता है,
वह संसार को जीत लेता है,
आत्म-ज्ञान की ज्योति,
को जलाए रखो।

गीता का ज्ञान, है जीवन का सार,
इसका अनुसरण कर,
बनाओ जीवन,
भवसागर से पार।

Bhagavad Gita Quotes For Students In Hindi

Bhagavad Gita Quotes For Students In Hindi

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन,
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि।।
अपने कर्म पर ध्यान केंद्रित करो,
फल की चिंता छोड़ दो, यही सच्चा ज्ञान है।

ज्ञानं ज्ञेयं परिज्ञाता त्रिविधा कर्मचोदना।
श्री मठकठोपनिषत् में कहा गया है,
ज्ञान, ज्ञेय और ज्ञाता, यही कर्म की तीन प्रेरणाएं,
जीवन की दिशा तय करती हैं, समझो इन्हें सदा।

अध्याय 2, श्लोक 47
मनुष्य अपने कर्मों का फल स्वयं पाता है,
इसलिए कर्म करो, फल की इच्छा मत रखो,
यही भगवद्गीता का सार है,
जीवन को सफल बनाने का मंत्र है।

नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः।
आत्मा अमर है, इसे कोई शस्त्र काट नहीं सकता,
न आग जला सकती है, न पानी भिगो सकता,
यह शाश्वत सत्य है, इसे सदा याद रखो,
अपने लक्ष्य की ओर बढ़ो, कभी मत डरो।

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
अपने कर्तव्य का पालन करो,
परिणाम की चिंता छोड़ दो,
जीवन की राह में आगे बढ़ते रहो,
सफलता अवश्य मिलेगी, यह सत्य जान लो।

समं पश्यन् हि सर्वत्र समवस्थितमीश्वरम्।
सभी प्राणियों में ईश्वर का वास देखो,
सबके प्रति समभाव रखो,
ईर्ष्या और द्वेष को त्यागो,
प्रेम और करुणा से हृदय को सींचो।

यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।
जब-जब धर्म की हानि होती है,
तब-तब मैं प्रकट होता हूँ,
सत्य और न्याय की स्थापना के लिए,
यह मेरा वचन है, सदा याद रखना।

न हि कश्चित् क्षणमपि जातु तिष्ठत्यकर्मकृत्।
कोई भी व्यक्ति एक क्षण भी कर्म किए बिना नहीं रह सकता,
इसलिए कर्म को अपना धर्म बनाओ,
सक्रिय रहो, अपने लक्ष्यों को प्राप्त करो,
जीवन को सार्थक बनाओ, सदा मुस्कुराओ।

अनाश्रितं कर्म फलं कार्यं कर्म करोति यः।
फल की इच्छा के बिना जो कर्म करता है,
वह वास्तव में योगी है,
उसका कर्म कभी व्यर्थ नहीं जाता,
सच्ची सफलता उसी को मिलती है।

परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्।
सज्जनों की रक्षा करने और दुष्टों का नाश करने के लिए,
मैं युग-युग में अवतरित होता हूँ,
धर्म की स्थापना मेरा लक्ष्य है,
हमेशा सत्य के मार्ग पर चलो।

श्रेयान् स्वधर्मो विगुणः परधर्मात् स्वनुष्ठितात्।
दूसरे के धर्म का पालन करने से,
अपना धर्म, भले ही वह अपूर्ण हो,
श्रेष्कर है, उसे ही अपनाओ,
जीवन में कभी भ्रमित न हो।

धृत्वात्मनि धृतिं कृत्वा समाधाने समाहितः।
मन को एकाग्र करो,
अपनी धृति को दृढ़ बनाओ,
लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करो,
सफलता तुम्हारे कदम चूमेगी।

ध्यायन्तो विश्वरूपं ते त्वया धृतमिदं जगत्।
हे ईश्वर, आपकी विश्वरूप का ध्यान करते हुए,
यह सारा ब्रह्मांड आपके द्वारा ही धारण किया गया है,
आप ही सृष्टि के रचयिता और पालक हैं,
आपके चरणों में मेरा प्रणाम है।

सर्वधर्मान् परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज।
सभी धर्मों को छोड़कर मुझमें शरण लो,
मैं तुम्हें सभी पापों से मुक्त कर दूँगा,
यह आश्वासन मेरा है,
ईश्वर पर विश्वास रखो।

उद्योगिनं पुरुषसिंहमुपैति लक्ष्मीः।
जो परिश्रमी और वीर पुरुष होता है,
उसी को लक्ष्मी प्राप्त होती है,
मेहनत से कभी मत घबराओ,
अपने सपनों को पूरा करो, हर पल मुस्कुराओ।

ये हि संस्पर्शजा भोगा दुःखयोनय एव ते।
इंद्रियों के सुख क्षणभंगुर होते हैं,
वे दुःख का कारण बनते हैं,
शांति और आनंद आत्मा में ही है,
उसे खोजने का प्रयास करो।

सुखदुःखे समे कृत्वा लाभालाभौ जयाजयौ।
सुख-दुःख, लाभ-हानि, जीत-हार को,
समान समझकर,
युद्ध के लिए तैयार हो जाओ,
यही कर्मयोग है, इसे अपनाओ।

न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते।
इस संसार में ज्ञान के समान,
कोई पवित्र वस्तु नहीं है,
ज्ञान प्राप्त करो, अज्ञान को दूर करो,
यह जीवन का सबसे बड़ा धन है।

न जायते म्रियते वा कदाचिन्नायं भूत्वा भविता वा न भ Jego।
आत्मा न तो जन्म लेता है, न मरता है,
यह कभी उत्पन्न नहीं होता,
यह नित्य है, शाश्वत है,
इसे समझो, भयमुक्त हो जाओ।

अविनाशी तु तद्विद्धि येन सर्वमिदं ततम्।
जान लो कि वह कौन है,
जिससे यह सब व्याप्त है,
वह अविनाशी है,
ईश्वर ही वह शक्ति है, उसे पहचानो।

Heart Touching Bhagavad Gita Quotes In Hindi

Heart Touching Bhagavad Gita Quotes In Hindi

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥
अपने कर्म पर तुम्हारा अधिकार है,
फल की प्राप्ति पर कभी नहीं।

सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज।
अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः॥
सभी धर्मों को त्याग कर,
मेरी शरण में आ जाओ, मैं तुम्हें सभी पापों से मुक्त कर दूंगा।

यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदाऽऽत्मानं सृजाम्यहम्॥
जब जब धर्म की हानि होती है,
और अधर्म का उत्थान होता है, तब तब मैं अपनी रचना करता हूँ।

नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः।
न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः॥
आत्मा को न शस्त्र काट सकते हैं,
न आग जला सकती है, न पानी गला सकता है, न हवा सुखा सकती है।

अव्यक्तोऽयमचिन्त्योऽयमविकार्योऽयम उच्यते।
तस्मादेवं विदित्त्वैनं नानुशोचितुमर्हसि॥
यह अविनाशी, अचिंत्य और अविकारी है,
इसलिए इसे जानकर तुम्हें शोक नहीं करना चाहिए।

ध्यायतो विषयान्पुंसः सङ्गस्तेषूपजायते।
सङ्गात्सञ्जायते कामः कामात्क्रोधोऽभिजायते॥
विषयों का चिंतन करते हुए,
मनुष्य को उनसे आसक्ति हो जाती है, आसक्ति से काम उत्पन्न होता है, और काम से क्रोध।

क्रोधाद्भवति सम्मोहः सम्मोहात्स्मृतिविभ्रमः।
स्मृतिभ्रंशाद्बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रणश्यति॥
क्रोध से भ्रम पैदा होता है,
भ्रम से स्मृति नष्ट हो जाती है, स्मृति के नष्ट होने से बुद्धि का नाश हो जाता है, और बुद्धि के नाश से मनुष्य का पतन हो जाता है।

ज्ञानं ज्ञेयं परिज्ञाता त्रिविधा कर्मचोदना।
करणं कर्म कर्तेति त्रिविधः कर्मसंग्रहः॥
ज्ञान, ज्ञेय और ज्ञाता,
ये कर्म के तीन भेद हैं।

समः शत्रु च मित्र च तथा मानापमानयोः।
शीतोष्णसुखदुःखेषु समः सङ्गविवर्जितः॥
जो शत्रु और मित्र में,
मान और अपमान में, शीत और उष्ण में, सुख और दुःख में समान रहता है।

कर्मणैव हि संसिद्धिमास्थिता जनकादयः।
लोकसंग्रहमेवापि सम्पश्यन्कर्तुमर्हसि॥
जनकादि भी कर्म द्वारा ही सिद्ध हुए,
इसलिए लोक कल्याण के लिए कर्म करना चाहिए।

क्षान्तिः क्षमा धृतिः शौचं
अद्रोहः नातिमानिता।
भवन्ति सम्पदं दैवीमभिजातस्य भारत॥
क्षमा, धैर्य, पवित्रता,
अद्रोह और अनात्म-सम्मान दैवी गुणों से युक्त मनुष्य के लक्षण हैं।

न हि कश्चित्क्षणमपि जातु तिष्ठत्यकर्मकृत्।
कार्यते ह्यवशः कर्म सर्वः प्रकृतिजैर्गुणैः॥
कोई भी प्राणी क्षण भर भी कर्म किए बिना नहीं रह सकता,
सब प्रकृति के गुणों द्वारा कर्म करने के लिए विवश होते हैं।

यथा प्रकाशयत्येकः कृत्स्नं लोकमिमं रविः।
क्षेत्रं क्षेत्री तथा कृत्स्नं प्रकाशयति भारत॥
जैसे एक सूर्य इस सारे लोक को प्रकाशित करता है,
वैसे ही क्षेत्र का स्वामी (ब्रह्म) सारे क्षेत्र को प्रकाशित करता है।

श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात्।
स्वभावजन्यं कर्म कुर्वन्नाप्नोति किल्बिषम्॥
गुणहीन होने पर भी अपना धर्म,
दूसरे के भली-भाँति आचरण किए हुए धर्म से उत्तम है।

प्रकृतेः क्रियमाणानि गुणैः कर्माणि सर्वशः।
अहंकारविमूढात्मा कर्ताऽहमिति मन्यते॥
सभी कर्म प्रकृति के गुणों द्वारा किए जाते हैं,
लेकिन अहंकार से मोहित आत्मा ‘मैं कर्ता हूँ’ ऐसा मानता है।

सुखदुःख the same, लाभ-अलाभ, जय-पराजय,
तथा युद्ध में, तू समान ही रह, न हो भय।
इस प्रकार युद्ध करने से,
तू पाप का भागी न होगा।

मनुष्य उन्हीं इच्छाओं से बंधा है,
जो अंतःकरण में रहती हैं।
इसलिए, अपनी इच्छाओं को नियंत्रित कर,
और मुक्त हो जा।

जो व्यक्ति मुझे सर्वव्यापी देखता है,
और मुझमें सब कुछ देखता है,
उससे मैं कभी ओझल नहीं होता,
और वह मुझ से कभी ओझल नहीं होता।

अपने कर्तव्य को बिना आसक्ति के करो,
क्योंकि कर्म के फल की चिंता,
तुम्हें शांति से दूर ले जाती है,
और मन को अशांत करती है।

जो व्यक्ति न तो किसी से द्वेष करता है,
न ही किसी को चाहत से देखता है,
जो शुभ-अशुभ से परे है,
वह मेरा प्रिय है।

Karma Bhagavad Gita Quotes In Hindi

Karma Bhagavad Gita Quotes In Hindi

कर्म कर तू फल की चिंता छोड़, अर्जुन
ईश्वर तेरा साथ देगा, यह जान
फल की आस से ही दुख होता है, समझ
कर्मयोगी का मार्ग है यह, तू पहचान।

जो तू करता है कर्म, वही तेरा साथी है
अतीत भूल, वर्तमान को अपना
भविष्य उसी से बनेगा, यह गति है
कर्म की डोर तू थाम, बना अपना।

कर्म ही धर्म है तेरा, और कर्म ही तेरा ज्ञान
फल मिले या ना मिले, तू किए जा
ईश्वर का दिया हुआ सब, यह मान
अपने कर्मों से तू सदा ही जिया जा।

निष्काम कर्म कर अर्जुन, उसी में है तेरी भलाई
फल की आस छोड़कर, जो भी कर
मन में शांति मिलेगी, तेरे मन की गहराई
हर क्षण तू ईश्वर में रमे, यही है सार।

जो कर्म तू करता है, वही तेरा लेखा-जोखा
शुभ कर्मों का फल मीठा, यह जान
बुरे कर्मों का परिणाम, देता है धोखा
कर्मों का चक्र है यह, तू कर न अज्ञान।

ईश्वर कर्म के फल का दाता, तू है कर्म करने वाला
चिंता छोड़, बस कर्तव्य निभा
सफलता-असफलता, यह सब मोह का ताला
मन को शांत रख, हर पल प्रभा।

कर्मों के बिना कोई भी नहीं रहता
शरीर भी कर्म करता है, चाहे अनजाने में
पर सचेत होकर किया गया कर्म, फल देता
यह ही है गीता का ज्ञान, हर बहाने में।

जो कर्म तूने किए हैं, वही तेरी पहचान
बदल सकते हो तुम अपना भविष्य
कर्मों से ही मिलता है, जीवन का सम्मान
हर पल जी, छोड़ सब संशय।

कर्म करते हुए भी, ईश्वर का ध्यान
यही है सच्चा योगी
न फल की इच्छा, न दुख का भान
हर पल बना रहता है योगी।

कर्मों के जाल में तू मत उलझ
राग-द्वेष से परे रह
अपने कर्तव्य पर, सदा तू डट
ईश्वर की कृपा तुझ पर सदा बह।

कर्म ही तेरी शक्ति है, कर्म ही तेरा बल
जो तू बोएगा, वही काटेगा
अपने कर्मों से ही, पाए तू फल
ईश्वर तुझे सदा देखेगा।

मन को शांत रख, कर्म को सर्वोपरि जान
फल की चिंता ईश्वर को सौंप दे
ईमानदारी से कर कर्म, यही है तेरा मान
सुख-दुख को समान भाव से तोल दे।

कर्म का लेखा-जोखा, बहुत ही गहरा
हर कर्म का हिसाब होता है
अच्छा या बुरा, जो भी तू करे
उसका परिणाम एक दिन मिलता है।

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन
यह गीता का सार है, समझ ले
कर्म करो, फल की चिंता मत कर
जीवन में सदा आगे बढ़ ले।

जो कर्म तू करता है, वही तेरा सार
उसी से तेरा जीवन बनता है
कभी मत छोड़, अपने कर्मों का प्यार
ईश्वर तुझसे सदा मिलता है।

कर्म की राह पर तू चलता जा
सत्य और न्याय का साथ पकड़
भले ही देर हो, पर तू पाता
ईश्वर का आशीर्वाद, अपने धड़क।

कर्मों का बोझ तू मत उठा
ईश्वर पर छोड़ दे सब
बस तू अपना कर्तव्य निभा
मिटा दे मन का सबThe Web.

कर्मों की महिमा, अपरंपार
जो जैसा करता है, वैसा पाता
ईश्वर की कृपा से, मिलती है बहार
हर पल कर्मों से ही जीवन सजाता।

कर्म ही तेरा सत्य है, कर्म ही तेरा धर्म
फल की आशा, व्यर्थ है
अपने कर्मों से ही, कर तू शर्म
ईश्वर का नाम, अर्द्ध है।

कर्म तू कर, निस्वार्थ भाव से
फल की चिंता, मन से निकाल
ईश्वर तुझसे मिलेगा, इसी प्रभाव से
जीवन तेरा होगा, खुशियों से मालामाल।

Short Bhagavad Gita Quotes In Hindi

Short Bhagavad Gita Quotes In Hindi

कर्म कर फल की चिंता ना कर,
मन को शांत रख, आगे बढ़,
जो हुआ, अच्छा हुआ,
जो होगा, वो भी अच्छा होगा।

मनुष्य अपने विचारों से ही बनता है,
जैसा सोचे, वैसा ही वो बनता है,
इसलिए शुद्ध विचार रखो,
जीवन सफल हो जाएगा।

क्रोध विनाश का मूल है,
यह सत्य को छुपा देता है,
शांत मन से निर्णय लो,
हर मुश्किल आसान हो जाती है।

आत्मा अमर है, इसका जन्म और मृत्यु नहीं,
यह बस एक शरीर से दूसरे शरीर में जाती है,
इसलिए मृत्यु से भयभीत न हो,
यह तो एक परिवर्तन है।

अपने कर्तव्य को समझो,
और उसे पूरी निष्ठा से करो,
फल की इच्छा मत रखो,
सफलता अवश्य मिलेगी।

जो इंद्रियों को वश में रखता है,
और मन को शांत रखता है,
उसकी बुद्धि स्थिर रहती है,
और वो हमेशा विजयी होता है।

अहंकार सब दुखों का कारण है,
इसे छोड़कर विनम्र बनो,
सबके प्रति प्रेम भाव रखो,
जीवन में शांति मिलेगी।

विश्वास ही शक्ति है,
जिस पर सब कुछ टिका है,
सच्चा विश्वास तुम्हें,
हर बाधा पार कराएगा।

जो व्यक्ति न सुख में हर्षित होता है,
और न दुख में व्यथित,
उसकी बुद्धि स्थिर मानी जाती है,
और वो मुक्ति के योग्य है।

धैर्य सबसे बड़ा तप है,
इससे सब कुछ प्राप्त किया जा सकता है,
धैर्यवान व्यक्ति,
कभी हार नहीं मानता।

जो वस्तुएं नष्ट होती हैं,
उन पर आसक्ति मत रखो,
आत्मज्ञान की प्राप्ति,
ही परम सत्य है।

तुम्हारे कर्म ही तुम्हारी पहचान हैं,
उन्हें ही अपना धर्म समझो,
बिना कर्म के,
कोई भी सिद्ध नहीं होता।

ईश्वर कण-कण में व्याप्त है,
उसे कहीं बाहर मत ढूंढो,
अपने हृदय में,
उसका वास जानो।

जो मन को नियंत्रित कर सकता है,
वही सबसे बड़ा योद्धा है,
क्योंकि बाहरी शत्रु से,
मन का शत्रु अधिक बलवान है।

सबकी भलाई में,
अपनी भलाई समझो,
जब तुम दूसरों के लिए जियोगे,
तब तुम सही अर्थों में जिओगे।

राग-द्वेष से परे रहो,
सम भाव से सब का आदर करो,
यही सच्चा ज्ञान है,
और यही सच्चा कर्म है।

अपने आस-पास देखो,
सब कुछ क्षणभंगुर है,
केवल परमात्मा का,
स्वरूप ही शाश्वत है।

जो व्यक्ति फल की इच्छा के बिना,
अपना कर्म करता है,
वह पाप से मुक्त रहता है,
और अंततः मोक्ष पाता है।

ज्ञान ही प्रकाश है,
जो अज्ञान के अंधकार को दूर करता है,
ज्ञान की खोज में,
निरंतर लगे रहो।

आत्म-नियंत्रण ही,
सफलता का मूल मंत्र है,
जो स्वयं को जीत लेता है,
वह जग को जीत लेता है।

Positive Thinking Bhagavad Gita Quotes In Hindi

Positive Thinking Bhagavad Gita Quotes In Hindi

कर्मण्यवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भुर्मे मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥
अपने कर्म पर ध्यान दो, फल की चिंता मत करो,
निष्काम भाव से कर्म करो, यही सच्चा धर्म है।

चिंता से मुक्ति का मार्ग,
भगवद् गीता में मिलता है,
मन को शांत करो,
हर समस्या का हल निकलता है।

जो हुआ, वह अच्छा हुआ,
जो हो रहा है, वह अच्छा हो रहा है,
और जो होगा, वह भी अच्छा ही होगा।
भूत, वर्तमान और भविष्य पर विश्वास रखो।

मन अशांत हो,
तो गीता का ज्ञान सुनो,
शांति अवश्य मिलेगी,
जीवन की राह सुगम होगी।

क्रोध ही सब नाश का कारण है,
इसे मन से दूर करो,
शांत चित्त से सोचे,
सफलता अवश्य मिलेगी।

अपने आप को संभालो,
तुम्हारा अपना ही मित्र और शत्रु है,
अज्ञान को दूर करो,
ज्ञान का प्रकाश फैलाओ।

जो मनुष्य सुख-दुख में,
और लाभ-हानि में,
समभाव रखता है,
वह अमर हो जाता है।

जन्म मृत्यु का चक्र,
अनंत है, पर आत्मा,
अजर-अमर है,
इस सत्य को जान लो।

जो ईश्वर को समर्पित,
होकर कर्म करता है,
उसे पाप नहीं लगता,
और वह मुक्त हो जाता है।

सत्य ही परम सत्य है,
इस पर सदा विश्वास रखो,
झूठ का मार्ग,
अंत में दुख ही देता है।

अपने मन को,
बस में रखना सीखो,
यह सबसे बड़ा धर्म है,
इसी से जीवन सुखी होगा।

जो व्यक्ति,
सभी इन्द्रियों को वश में रखता है,
और कर्म करता है,
वह बुद्धिमान कहलाता है।

ईश्वर हर जगह,
और हर प्राणी में,
विद्यमान है,
उसे पहचानो, वही सत्य है।

भय से मुक्ति,
तभी मिलती है,
जब तुम,
ईश्वर पर विश्वास रखते हो।

आत्म विश्वास,
सबसे बड़ा धन है,
इसे कभी न खोना,
जीवन में आगे बढ़ते रहना।

जो व्यक्ति,
अहंकार से मुक्त होकर,
कर्म करता है,
वह ईश्वर को प्राप्त करता है।

निराशा कभी न,
अपने मन में लाओ,
गीता का ज्ञान,
हमेशा याद दिलाओ।

सब कुछ नश्वर है,
केवल आत्मा,
अजर-अमर है,
इस सत्य को जानो।

ईश्वर ही,
हमारा रक्षक है,
उसके चरणों में,
सब कुछ छोड़ दो।

सकारात्मक सोच,
रखो हमेशा,
जीवन में,
खुशियां ही खुशियां होंगी।

Krishna Bhagavad Gita Quotes In Hindi

Krishna Bhagavad Gita Quotes In Hindi

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन,
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥
ये कार्य हैं, उन्हीं में तेरा अधिकार है,
फल में कभी नहीं, इसलिए फल का हेतु मत हो,
और अकर्म में भी तेरी आसक्ति न हो॥

नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः,
न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः॥
इस आत्मा को शस्त्र काट नहीं सकते,
अग्नि जला नहीं सकती, जल गला नहीं सकता,
और वायु सुखा नहीं सकती॥

यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत,
अभ्युत्थानं अधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥
जब-जब धर्म की हानि होती है और अधर्म बढ़ता है,
तब-तब मैं अपने अंश को प्रकट करता हूँ,
हे भारत, तभी मैं अपने को प्रकट करता हूँ॥

परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्,
धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे॥
सज्जन पुरुषों के कल्याण के लिए,
और दुष्ट व्यक्तियों के विनाश के लिए,
तथा धर्म की अच्छी तरह स्थापना के लिए,
मैं युग-युग में प्रकट होता हूँ॥

सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज,
अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः॥
सब प्रकार के धर्मों को छोड़कर केवल मेरी शरण में आओ,
मैं तुम्हें सभी पापों से मुक्त कर दूँगा,
तुम शोक मत करो॥

ध्यायतो विषयां पुंसः सङ्गस्तेषूपजायते,
सङ्गात्सञ्जायते कामः कामात्क्रोधोऽभिजायते॥
विषयों का चिंतन करने वाले पुरुष की उन विषयों में आसक्ति हो जाती है,
आसक्ति से काम उत्पन्न होता है,
काम से क्रोध उत्पन्न होता है॥

क्रोधो भवति सम्मोहात् सम्मोहात् स्मृतिविभ्रमः,
स्मृतिभ्रंशाद्बुद्धिनाशः बुद्धिनाशात्प्रणश्यति॥
क्रोध से मोह उत्पन्न होता है,
मोह से स्मृति का भ्रम हो जाता है,
स्मृति के भ्रम से बुद्धि का नाश हो जाता है,
और बुद्धि का नाश होने पर मनुष्य नष्ट हो जाता है॥

न हि कश्चित् क्षणमपि जातु तिष्ठत्यकर्मकृत्,
कार्यते ह्यवशः कर्म सर्वः प्रकृतिजैर्गुणैः॥
कोई भी मनुष्य किसी भी क्षण कर्म किए बिना नहीं रह सकता,
क्योंकि प्रकृति से उत्पन्न गुण उसे कर्म करने के लिए विवश करते हैं,
सबको कर्म करना ही पड़ता है॥

श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात्,
स्वभावनियतं कर्म कुर्वन्नाप्नोति किल्बिषम्॥
दूसरे के अच्छी तरह आचरण में लाए हुए धर्म से,
गुण रहित भी अपना धर्म श्रेष्ठ है,
अपने स्वभाव से नियत कर्म को करता हुआ मनुष्य,
पाप को प्राप्त नहीं होता॥

अशरीरं वाक्यमिदं पावनं परमर्षिभिः,
यं श्रुत्वा मुच्यते जन्तुः संसारं सर्वपातकैः॥
यह अशरीरी (शरीर से परे) वाक्य परम ऋषियों द्वारा,
कहा गया है और पवित्र है,
जिसे सुनकर मनुष्य जन्म-मरण के चक्र और
सभी पापों से मुक्त हो जाता है॥

यः प्रपश्यति च न पश्यति सर्वभूतान्तरात्मनम्,
तस्य धीः सर्वभूतेषु न च ममैव सर्वभूतेषु॥
जो समस्त प्राणियों में एक ही आत्मा को देखता है,
और आत्मा से सबको देखता है,
उसके लिए वह भ्रम नहीं रहता॥

समानं मन्त्रं मोहति सर्व भूतेषु समस्थितम्,
न तं शोचति यः पश्येत् सर्वभूतेषु समस्थितम्॥
जो पुरुष परमात्मा को सर्वत्र समान रूप से स्थित,
और सब भूतों में अभिन्न देखता है,
वह पुरुष किसी भी प्राणी के प्रति,
हिंसा नहीं करता, इसलिए वह< > पाप को प्राप्त नहीं होता॥

उद्धरेदात्मनात्मानं नात्मानमवसादयेत्,
आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः॥
मनुष्य को चाहिए कि वह अपने द्वारा अपना
उद्धार करे, और अपने को नीचे न गिराए,
क्योंकि अपना आप ही अपना मित्र है,
और अपना आप ही अपना शत्रु है॥

ज्ञानं ज्ञेयं ज्ञानगम्यं हृदि सर्वस्य प्रतिष्ठितम्,
यज्ज्ञात्वाऽमृतमश्नुते तद्गन्ताऽपि स उच्यते॥
जो जानने योग्य है, ज्ञान है,
और जो समस्त प्राणियों के हृदय में स्थित है,
जिसको जानकर मनुष्य अमर हो जाता है,
उसे ही वह ज्ञेय कहता है॥

न जायते म्रियते वा कदाचिन्नायं भूत्वा भविता वा न भूयः,
अजो नित्यः शाश्वतोऽयं पुराणो न हन्यते हन्यमाने शरीरे॥
यह आत्मा किसी भी काल में न तो जन्म लेता है,
और न ही मरता है; न यह उत्पन्न होकर,
फिर से होने वाला है, क्योंकि यह अजन्मा,
नित्य, शाश्वत और पुरातन है॥

समः शत्रौ च मित्रे च तथा मानापमानयोः,
समः शीतोष्णवर्षेषु सुखदुःखेषु समः तथा॥
शत्रु और मित्र में, तथा मान और अपमान में,
तथा सर्दी, गर्मी, वर्षा आदि द्वंद्वों में,
सुख और दुःख में जो समभाव रखता है॥

ये यथा मां प्रपद्यन्ते तांस्तथैव भजाम्यहम्,
मम वर्त्मनुवर्तन्ते मानुषाः पार्थ सर्वशः॥
हे पार्थ, जिस भाव से मनुष्य मेरा भजन करते हैं,
मैं भी उसी भाव से उनका भजन करता हूँ,
क्योंकि सब मनुष्य सब प्रकार से मेरे ही मार्ग का अनुसरण करते हैं॥

सर्वं खल्विदं ब्रह्म तज्जलानिति शान्त उपासीत,
अर्थात्, सब कुछ ब्रह्म ही है, उसी से उत्पन्न होता है,
उसी में लीन होता है, उसी में जीवित रहता है,
इस प्रकार शांतिपूर्वक उपासना करनी चाहिए॥

मनुष्याणां सहस्रेषु कश्चिद्यतति सिद्धये,
यततामपि सिद्धानां कश्चिन्मां वेत्ति तत्त्वतः॥
हजारों मनुष्यों में कोई एक,
पूर्णता (मोक्ष) के लिए प्रयत्न करता है,
और उन प्रयत्न करने वाले सिद्धों में भी,
कोई एक मुझे तत्व से जानता है॥

यः सर्वज्ञः सर्ववित् तस्य ज्ञानं परमं तपः,
सर्वस्य प्रभवोऽप्यत्र सम्भूतं च सर्वदा॥
जो सर्वज्ञ है, सब जानता है,
उसका यह ज्ञान ही परम तप है,
सबकी उत्पत्ति का स्रोत भी वही है,
और उसी से सब कुछ सदा उत्पन्न होता है॥

Good Morning Bhagavad Gita Quotes In Hindi

Good Morning Bhagavad Gita Quotes In Hindi

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन,
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि।
हर दिन कर्म करते रहो, फल की चिंता ना करो,
यह गीता का सार है, इसे जीवन में धारण करो।

नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः,
न चैनं क्लिेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः।
आत्मा अजर-अमर है, उसे शस्त्र भेद नहीं सकते,
हर सुबह यह जान लो, और चिंता से मुक्त हो सकते।

यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत,
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्।
जब-जब अधर्म बढ़ेगा, धर्म की हानि होगी,
ईश्वर का आगमन तब, दुष्टों का हानी होगी।

समं समं सर्वेषु भूतेषु तिष्ठन्तं ईश्वरम्,
विनश्यत्सु विनश्यन्तं यः पश्यति स पण्डितः।
सब में ईश्वर को देखो, समभाव से सब को जानो,
जो यह समझे वही ज्ञानी, उसे ही तुम मानो।

ध्यायतो विषयां पुंसः सङ्गस्तेषूपजायते,
सङ्गात् सं जायते कामः कामात् क्रोधोऽभिजायते।
विषयों का चिंतन छोडो, आसक्ति को दूर करो,
इससे कामना मिटेगी, और क्रोध से तुम बचोगे।

श्रेयान् स्वधर्मो विगुणः परधर्मात् स्वनुष्ठितात्,
स्वभावनियतं कर्म कुर्वन्नाप्नोति किल्बिषम्।
अपना धर्म सर्वोत्तम है, चाहे उसमें कुछ कमी हो,
दूसरों के धर्म में जाकर, पाप की न कोई नमी हो।

अव्यक्तोऽयम् अचिन्त्योऽयम् अविकार्योऽयम् उच्यते,
तस्मादेवं विद्वि एनं न त्वं सोचि तुमर्हसि।
आत्मा तो अव्यक्त है, अजर-अमर, अविनाशी,
इस पर दुखी न हो, यह समझो तुम निवासी।

कर्म न त्याग करो मनुष्य, कर्म ही तेरा धर्म,
फल की चिंता छोड़ दे, जीवन होगा सुगम।
जो होगा सो होगा निश्चित, सब है ईश्वर की माया,
तू बस कर्म कर जाता रह, यही है जीवन की काया।

“जो मनुष्य अपनी इंद्रियों को नियंत्रित कर लेता है,
वह सब दुखों से मुक्त हो जाता है।”
हर सुबह यह सोच लो, मन को शांत रख लो,
इंद्रियों पर संयम कर लो, सुख को तुम ही चखो।

“सत्व, रज और तम ये तीन गुण से सब बंधे हैं,
इन से परे हो जाओ तो जन्म-मरण से छूटे हैं।”
जाग जा मन मेरे आज, गुणों से मुक्त हो जा,
जीवन की इस राह पर, शांति से आगे बढ़ जा।

“क्रोध से मूढ़ता आती है, मूढ़ता से स्मृति भ्रम होता है,
स्मृति भ्रम से बुद्धि का नाश होता है, और बुद्धि नाश से मनुष्य का पतन होता है।”
गुस्से को दूर भगा दे तू, मन को शांत बना ले,
ज्ञान की राह पर चल कर, जीवन खुशियों से भर ले।

“जो व्यक्ति सभी इच्छाओं का त्याग कर देता है,
और ‘मैं’ और ‘मेरा’ की भावना से मुक्त हो जाता है,
वह शांति को प्राप्त करता है।”
सब इच्छाओं को त्याग दे, ‘मैं’ ‘मेरा’ सब छोड़ दे,
शांति ही शांति मिलेगी, जीवन सुख से मोड़ दे।

“आत्म संयम वाली व्यक्ति के लिए, मन ही सर्वश्रेष्ठ मित्र है,
लेकिन जिसके मन पर कोई नियंत्रण नहीं है, उसके लिए मन ही सबसे बड़ा शत्रु है।”
मन को बस में रख ले तू, बन जा तेरा ही मित्र,
यदि मन बिगड़ा तेरा, बन जाएगा तेरा शत्रु नित्य।

“जो व्यक्ति सभी जीवों में एक ही ईश्वर को देखता है,
और सभी में समभाव रखता है, वह सबसे श्रेष्ठ योग साधक है।”
हर प्राणी में ईश्वर देखो, सब से प्यार करो आज,
यही है जीवन का सत्य, मानो मेरा यह राज।

“ज्ञान की अग्नि सभी कर्मों के फल को भस्म कर देती है।”
ज्ञान का दीप जला ले तू, हर अंधेरा मिट जाएगा,
कर्मों के फल की चिंता, सब क्षण में दूर हो जाएगा।

“जो न किसी से द्वेष करता है, और न किसी से ईर्ष्या,
वह कर्म योगी बन जाता है, उसकी होती है जीत प्रिया।”
न किसी से बैठे वैर, न ईर्ष्या मन में लाए,
कर्म योगी बन जा तू, जीवन सफल बनाए।

“जो व्यक्ति शरीर को देवता मानकर उसकी पूजा करता है,
और सब की सेवा करता है, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।”
तन को मंदिर मान ले, सेवा भाव भर ले तू,
मोक्ष की राह खुलेगी, जीवन में खुशियाँ भर लें तू।

“सभी कार्य भगवान को समर्पित कर दो,
तो पाप और पुण्य दोनों से मुक्त हो जाओगे।”
हर काम ईश्वर को सौंप दे, फल की चिंता मिटा दे,
पाप-पुण्य से ऊपर उठ जा, जीवन को दिव्य बना दे।

“जो व्यक्ति अपने मन को शांत रखता है,
और सब की भलाई चाहता है,
वह भगवान के समीप पहुँच जाता है।”
मन को शांति दे तू आज, सब का भला सोच ले,
ईश्वर तेरे पास ही है, यह बात मान ले।

“अहंकार से मनुष्य अंधा हो जाता है,
और सही-गलत का ज्ञान खो देता है।”
अहंकार को त्याग दे तू, ज्ञान की आँखें खोल,
सही-गलत को पहचान ले, जीवन की बदल जा रोल।

Bhagavad Gita Good Morning Quotes In Hindi

Bhagavad Gita Good Morning Quotes In Hindi

उठो, जागो और तब तक मत रुको, जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए,
यह गीता का सार है, जीवन को सही राह पर ले जाए।
हर दिन एक नई शुरुआत है, नई उमंगों के साथ,
सकारात्मक सोच संग आगे बढ़ो, जीवन की हर राह।

कर्म करो, फल की चिंता मत करो, यही सच्चा ज्ञान है,
सुबह की पहली किरण संग, दूर करो सारा अज्ञान है।
मन को शांत रखो, विचारों को शुद्ध बनाओ,
जीवन का हर पल, आनंद से तुम मनाओ।

जो हुआ, अच्छा हुआ, जो हो रहा है, वह भी अच्छा है,
श्री कृष्ण की वाणी में, जीवन का सच्चा सार है।
सुबह की चाय संग, गीता का एक श्लोक,
मिटा देगा जीवन का, सारा ही शोक।

तुम्हारा अधिकार केवल कर्म करने में है, फल में नहीं,
यह सीख देती है गीता, हर पल, हर कहीं।
नई सुबह का स्वागत करो, नई आशाओं के संग,
जीवन को बनाओ सुंदर, प्रेम और उमंग के रंग।

हर अवस्था में स्थित रहो, समभाव को अपनाओ,
यही गीता का उपदेश है, जीवन को सुखमय बनाओ।
सुबह की ताज़ी हवा में, ले लो यह प्रण,
जीना है हर पल, जैसे हो कोई पावन क्षण।

जो व्यक्ति बाहरी सुखों से विचलित नहीं होता,
वह गीता के मार्ग पर चलता है, कभी नहीं सोता।
भोर की पहली किरण संग, मन को कर लो शांत,
जीवन की हर चुनौती को, कर दो तुम अनंत।

आत्म संयम ही परम सुख है, यह गीता कहती है,
सुबह की बेला में, यह बात मन में रहती है।
हर दिन एक नया अवसर है, कुछ अच्छा करने का,
ईश्वर का नाम लेकर, प्रयास मत छोड़ने का।

जो अपने मन पर विजय प्राप्त करता है,
वह गीता के ज्ञान से, जीवन को तारता है।
सुप्रभात! आज का दिन हो मंगलमय,
भगवान की कृपा से, हो हर कार्य सुगममय।

सभी प्राणियों में, एक ही आत्मा देखो,
समान दृष्टि से, सबको तुम लेखो।
सुबह की यह बेला, है ज्ञान का भंडार,
गीता के अनमोल वचनों से, करो जीवन साकार।

निराशा को दूर करो, आशा को अपनाओ,
गीता का ज्ञान जीवन में, हर पल तुम लाओ।
सूरज की पहली किरण संग, नवजीवन का हो आरंभ,
ईश्वर की कृपा से, मिले तुम्हें सुख सर्व।

जो इंद्रियों को वश में रखता है, वही बुद्धिमान है,
गीता का यह उपदेश, जीवन का वरदान है।
सुबह की शांति में, मन को एकाग्र करो,
अपने लक्ष्य की ओर, तुम निडर बढ़ चलो।

जो व्यक्ति किसी भी वस्तु में, आसक्ति नहीं रखता,
वह गीता के मार्ग पर चलकर, सुख प्राप्त करता।
नई भोर का सूर्य जैसे, अंधकार को चीरता,
वैसे ही गीता का ज्ञान, अज्ञान को हरता।

जो व्यक्ति अपने कर्तव्य को, बिना किसी स्वार्थ के करता है,
वह अपने जीवन को, परम सुख से भरता है।
सुप्रभात! आज का दिन, लाए खुशियों की बहार,
गीता के ज्ञान से, हो जीवन में उजियार।

राग-द्वेष से परे रहकर, सब कुछ सहन करो,
गीता के इस उपदेश से, जीवन को पावन करो।
सुबह की ओस जैसे, मन को करती है निर्मल,
वैसे ही गीता का ज्ञान, मिटाता है हर छल।

जो व्यक्ति धैर्य से, सब कुछ सह लेता है,
वह गीता के मार्ग पर चलकर, विजय प्राप्त कर लेता है।
हर दिन की शुरुआत, ईश्वर के नाम से करो,
जीवन की हर मुश्किल को, तुम पार करो।

ज्ञान और कर्म का, जब मेल हो जाता है,
तब व्यक्ति परम आनंद को, प्राप्त कर जाता है।
सुप्रभात! आज का दिन, हो अति मंगलकारी,
गीता के विचारों से, बने राह तुम्हारी।

जो अपने चित्त को, स्थिर रखता है,
वह गीता के ज्ञान से, जीवन को संवारता है।
भोर की मंद पवन जैसे, मन को देती है शांति,
गीता का ज्ञान भी, देता है यही क्रांति।

अपने अंदर देखो, वही ईश्वर तुम्हें मिलेगा,
गीता का यह सत्य, हर पल जो तुम्हें खिलेगा।
नई सुबह का सूरज, दे आशा की किरण,
गीता के ज्ञान संग, हो जीवन का हर क्षण।

जो व्यक्ति निष्काम भाव से, कर्म करता जाता है,
वह जीवन के हर बंधन से, मुक्त हो जाता है।
सुप्रभात! आज का दिन, लाए नई उमंग,
गीता की शिक्षाओं संग, जीवन में हो आनंद।

सभी का कल्याण हो, यही भाव मन में रखो,
गीता का यह संदेश, हर दिन तुम जपो।
सुबह की लालिमा जैसे, देती है एक नया रूप,
गीता का ज्ञान भी, जीवन का है अनूप।

Heart Touching Karma Bhagavad Gita Quotes In Hindi

Heart Touching Karma Bhagavad Gita Quotes In Hindi

कर्म को करो, फल की चिंता न करो,
बस अपना धर्म निभाओ, आगे बढ़ते चलो।
ईश्वर का आशीर्वाद तुम पर सदा रहे,
जीवन की हर राह में, सुख ही सुख बहे।

जो भी कर्म करोगे, वैसा ही फल पाओगे,
मन में निष्ठा रखोगे, तो सफल हो जाओगे।
नियति को स्वीकार करो, हर पल को जियो,
कृष्ण की शिक्षाओं को, हृदय में पिरो।

कर्मयोग ही श्रेष्ठ है, जीवन का सार,
फल की आस छोड़ दो, करो स्वीकार।
जो होता है, वो अच्छे के लिए होता है,
हर कर्म में छिपा, ईश्वर का सोता है।

अकर्मण्य न बनो, कर्म से मत डरो,
फलों की आस छोड़, बस करते चलो।
तुम्हारा कर्तव्य है कर्म करना,
फल तो प्रभु देगा, फिर क्यों है मरना।

मन को शांत रखो, कर्म में लीन रहो,
संसार के मायाजाल से, तुम दूर रहो।
सब कुछ ईश्वर को अर्पित कर दो,
शांत चित्त से, अपने कर्म को करो।

कर्म तुम्हारा अधिकार है, फल नहीं,
कर्म करो निष्काम भाव से, ये है सही।
न喜 न द्वेष, बस कर्तव्य पथ पर बढ़ते जाओ,
जीवन की हर बाधा को, तुम पार कर जाओ।

जो भी चाहो, कर्म से ही पाओगे,
प्रभु की कृपा से, सब कुछ पाओगे।
ईमानदारी से करो, जो भी काम,
मिलेगा अवश्य, सुख-समृद्धि का नाम।

बीते हुए कर्म का, मत करो चिंतन,
आने वाले कर्म का, करो स्मरण।
वर्तमान में जियो, कर्म को साधो,
ईश्वर के मार्ग पर, तुम आगे बढ़ो।

सब कर्म ईश्वर को अर्पण कर दो,
मोह-माया को अपने मन से हर दो।
शांत हो जाओगे, दुख दूर होंगे,
जीवन के सभी लक्ष्य, पूर्ण होंगे।

निष्ठावान बनकर, कर्म को निभाओ,
सफलता अवश्य मिलेगी, यही जान जाओ।
ईश्वर का स्मरण करो, हर पल,
जीवन का हर क्षण, होगा निर्मल।

कर्म ही पूजा है, कर्म ही धर्म,
फल की चिंता छोड़, रखो ये मर्म।
हर कार्य में ईश्वर का अंश देखो,
जीवन को अपने, तुम सुखी लेखो।

जो बीत गया, उसे भूल जाओ,
आने वाला कल, तुम संवार जाओ।
कर्म करो आज, पूरी लगन से,
मिलेगा सुख अवश्य, अपने मन से।

फल की इच्छा नहीं, बस कर्म करते जाओ,
सकारात्मक सोच संग, आगे बढ़ते जाओ।
तुम्हारी मेहनत रंग लाएगी, एक दिन,
खुशियों से भर जाएगा, तुम्हारा जीवन।

ईश्वर साक्षी है, तुम्हारे कर्म का,
सोच समझकर करो, हर एक धर्म का।
मन की पवित्रता, सबसे है महान,
कर्म से ही होगा, तेरा कल्याण।

कर्म बंधन का कारण, पर योग से मुक्त,
निष्कपट भाव से करो, न हो कोई त्रुटि।
प्रभु की शरण में, सब कुछ छोड़ दो,
जीवन का आनंद, तुम भर-भर लो।

हर कर्म में सीख है, हर सीख में ज्ञान,
अपने कर्मों से ही, करो अपना निर्माण।
समर्पण भाव से, कर्म को स्वीकारो,
ईश्वर तुम्हें अवश्य, उन्नति दारों।

जो हो रहा है, वो उचित है,
कर्म करते जाओ, यही उचित है।
फल की चिंता छोड़, आनंद मनाओ,
जीवन को अपने, तुम सुखी बनाओ।

कर्म तुम्हारा सच्चा साथी,
फल प्रभु की देन, ये है नाती।
निष्ठा से करो, जो भी हो काम,
मिलेगा अवश्य, सुख का पैगाम।

न भटकाव, न भय, बस कर्म करो,
ईश्वर पर विश्वास रख, आगे बढ़ो।
तुम्हारा कर्म ही, तुम्हारी पहचान,
यही है गीता का, सच्चा ज्ञान।

जो भी कर्म करो, मन से करो,
सफलता अवश्य मिलेगी, तुम ये भरो।
ईश्वर की कृपा, सदा साथ रहेगी,
खुशियों की बहार, तब आएगी।

Conclusion

यह लेख Bhagavad Gita Quotes In Hindi के माध्यम से जीवन की गहरी सच्चाइयों और प्रेरणादायक संदेशों को दर्शाता है। इन अनमोल वचनों में छिपी ज्ञान की धारा हमें कर्म, धर्म और आत्म-ज्ञान के पथ पर चलने की प्रेरणा देती है, जो हर व्यक्ति के लिए मार्गदर्शक हैं।

हमने Bhagavad Gita Quotes In Hindi के माध्यम से मन की शांति और आंतरिक शक्ति पाने का मार्ग देखा। ये विचार हमें सिखाते हैं कि कैसे कठिनाइयों में भी स्थिर रहें और अपने कर्तव्यों का पालन करें, जिससे जीवन का असली सार समझ आता है।

अंततः, Bhagavad Gita Quotes In Hindi हमें जीवन के प्रति एक सकारात्मक दृष्टिकोण रखने की शिक्षा देते हैं। इन श्लोकों को आत्मसात कर हम अपने प्रियजनों के साथ भी जीवन की वास्तविक खुशियाँ साझा कर सकते हैं और उन्हें भी प्रेरित कर सकते हैं।

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